नवरात्रि में चौथे दिन देवी को कुष्मांडा के रूप में पूजा जाता है। जब सृष्टि की रचना नहीं हुई थी उस समय अंधकार का साम्राज्य था, तब देवी कुष्मांडा द्वारा ब्रह्माण्ड का जन्म होता है अत: यह देवी कूष्माण्डा के रूप में विख्यात हुई हैं। इस देवी का निवास सूर्यमण्डल के मध्य में है और यह सूर्य मंडल को अपने संकेत से नियंत्रित रखती हैं।

अपनी मंद, हल्की हंसी के द्वारा अण्ड यानी ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इस देवी को कुष्मांडा नाम से अभिहित किया गया है। इसीलिए इसे सृष्टि की आदिस्वरूपा या आदिशक्ति कहा गया है। माँ जगदम्बे की भक्ति पाने के लिए इसे कंठस्थ कर नवरात्रि में चतुर्थ दिन इसका जाप करना चाहिए।

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

अर्थ: हे माँ! सर्वत्र विराजमान और कूष्माण्डा के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है। या मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूँ। हे माँ, मुझे सब पापों से मुक्ति प्रदान करें।

नवरात्रि के व्रत में इन बातों का रखना चाहिए खास ख्याल:

  • नवरात्रि में नौ दिन का व्रत रखने वालों को दाढ़ी-मूंछ और बाल नहीं कटवाने चाहिए पर इस दौरान बच्चों का मुंडन करवाना शुभ माना जाता हैं।
  • नौ दिनों तक नाखून नहीं काटने चाहिए।
  • अगर आप नवरात्रि में कलश स्थापना कर रहे हैं, माता की चौकी का आयोजन कर रहे हैं या अखंड ज्योति‍ जला रहे हैं तो इन दिनों घर खाली छोड़कर नहीं जाना चाहिए।
  • इस दौरान खाने में प्याज, लहसुन और नॉन वेज बिल्कुल न खाएं।
  • जो नौ दिन का व्रत रखते हैं उनको काले कपड़े नहीं पहनने चाहिए और बेल्ट, चप्पल-जूते, बैग जैसी चमड़े की चीजों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
  • व्रत रखने वालों को नौ दिन तक नींबू नहीं काटना चाहिए।
  • व्रत में नौ दिनों तक खाने में अनाज और नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। खाने में कुट्टू का आटा, समारी के चावल, सिंघाड़े का आटा, साबूदाना, सेंधा नमक, फल, आलू, मेवे, मूंगफली खाना चाइए।
  • विष्णु पुराण के अनुसार, नवरात्रि व्रत के समय दिन में सोने, तम्बाकू चबाने और शारीरिक संबंध बनाने से भी व्रत का फल नहीं मिलता हैं।

कुष्माण्डा देवी कौन हैं?

ये नवदुर्गा का चौथा स्वरुप हैं जिन्होंने अपनी हल्की हंसी से ब्रह्मांड को उत्पन्न किया था, जिसके कारण इनका नाम कुष्माण्डा पड़ा। ये अनाहत चक्र को नियंत्रित करती हैं। मां की आठ भुजाएं हैं इसलिए इन्हें अष्टभुजा देवी भी कहते हैं। संस्कृत भाषा में कुष्माण्डा को कुम्हड़ कहते हैं और मां कुष्माण्डा को कुम्हड़ा विशेष रूप से प्रिय है। ज्योतिष में मां कुष्माण्डा का संबंध बुध ग्रह से है।

क्या है देवी कुष्माण्डा की पूजा विधि?

  • सुबह स्नान करके हरे कपड़े पहनकर मां कुष्माण्डा का पूजन करें, फिर पूजन के दौरान मां को हरी इलाइची, सौंफ और कुम्हड़ा अर्पित करें।
  • इसके पश्‍चात ‘ॐ कुष्मांडा देव्यै नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करें।
  • मां की पूजा के बाद भगवान शंकर की पूजा करना ना भूलें। इसके बाद भगवान विष्‍णु और मां लक्ष्‍मी की पूजा एक साथ करें।

मां कुष्माण्डा का विशेष प्रसाद क्या है?

  • सबसे पहले मां कुष्माण्डा को मालपुए का भोग लगाएं उसके बाद प्रसाद को ब्राह्मण को दान कर दें और फिर खुद भी खाएं।
  • इससे बुद्धि का विकास होने के साथ-साथ निर्णय क्षमता भी अच्छी हो जाती हैं।

स्तोत्र पाठ:

दुर्गतिनाशिनी त्वंहि दरिद्रादि विनाशनीम्।

जयंदा धनदा कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥

जगतमाता जगतकत्री जगदाधार रूपणीम्।

चराचरेश्वरी कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥

त्रैलोक्यसुन्दरी त्वंहिदुःख शोक निवारिणीम्।

परमानन्दमयी, कूष्माण्डे प्रणमाभ्यहम्॥

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